Wednesday, July 30, 2008

हिप्पी कट भक्तभगवान

एक हिप्पी कट भक्त भगवान के सामने अडा रहा
जब तक भगवान प्रसन्न नहि हुए एक टांग पे खडा रहा
भागवान प्रसन्न हुयेबालक वर मागोवो घबराया,फ़िर जोर से चिल्लाया
भागवान मेरे इन लम्बे बालो को देखधोखा मत खाइए
वर तो मै खुद हू कोई कन्या दिलवाइए

आराम करो !

एक मित्र मिले, बोले, "लाला, तुम किस चक्की का खाते हो? इस डेढ़ छँटाक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो।

क्या रक्खा है माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो

संक्रान्ति-काल की बेला है, मर मिटो, जगत में नाम करो।

"हम बोले, "रहने दो लेक्चर, पुरुषों को मत बदनाम करो।

इस दौड़-धूप में क्या रक्खा, आराम करो, आराम करो।

आराम ज़िन्दगी की कुंजी, इससे तपेदिक होती है।

आराम सुधा की एक बूंद, तन का दुबलापन खोती है।

आराम शब्द में 'राम' छिपा जो भव-बंधन को खोता है।

आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है।

इसलिए तुम्हें समझाता हूँ, मेरे अनुभव से काम करो।


ये जीवन, यौवन क्षणभंगुर, आराम करो, आराम करो

यदि करना ही कुछ पड़ जाए तो अधिक तुम उत्पात करो

घर में बैठे-बैठे बस लंबी-लंबी बात करो

करने -धरने में क्या रक्खा जो रक्खा बात बनाने मेंजो ओठ हिलाने में रस है, वह कभी हाथ हिलाने में।

तुम मुझसे पूछो बतलाऊँ -- है मज़ा मूर्ख कहलाने में।

जीवन-जागृति में क्या रक्खा जो रक्खा है सो जाने में।

मैं यही सोचकर पास अक्ल के, कम ही जाया करता हूँ।

जो बुद्धिमान जन होते हैं, उनसे कतराया करता हूँ।

दीए जलने के पहले ही घर में जाया करता हूँ।

जो मिलता है, खा लेता हूँ, चुपके सो जाया करता हूँ।

मेरी गीता में लिखा हुआ -- सच्चे योगी जो होते हैं,वे कम-से-कम बारह घंटे तो बेफ़िक्री से सोते हैं।

अदवायन खिंची खाट में जो पड़ते ही आनंद आता है।

वह सात स्वर्ग, अपवर्ग, मोक्ष से भी ऊँचा उठ जाता है।

जब 'सुख की नींद' कढ़ा तकिया, इस सर के नीचे आता है,तो सच कहता हूँ इस सर में, इंजन जैसा लग जाता है।

मैं मेल ट्रेन हो जाता हूँ, बुद्धि भी फक-फक करती है।

भावों का रश हो जाता है, कविता सब उमड़ी पड़ती है।

मैं औरों की तो नहीं, बात पहले अपनी ही लेता हूँ।

मैं पड़ा खाट पर बूटों को ऊँटों की उपमा देता हूँ।

मैं खटरागी हूँ मुझको तो खटिया में गीत फूटते हैं।

छत की कड़ियाँ गिनते-गिनते छंदों के बंध टूटते हैं।

मैं इसीलिए तो कहता हूँ मेरे अनुभव से काम करो।

यह खाट बिछा लो आँगन में, लेटो, बैठो, आराम करो।

- गोपालप्रसाद व्यास

पहलवान की सुहागरात

लीजिए अब सुनिए एक पहलवान की सुहागरात का हाल:

एक पहलवान का होने वाला था विवाहउसके दोस्तों ने दी उसे सलाहलड़की से जरा कोमल बात करनाभावुकता भरे शब्दों की बरसात करना।

प्रथम रात्रि में पहलवान ने मुगदर घुमायापलंग का बाईसवां चक्कर लगायाऔर बहुत सोच समझकर बोला "पंजा लड़ायेगी"

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये

मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये


तुम MA फर्स्ट डिविजन हो, मैं हुआ मेट्रिक फेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये


तुम फौजी अफसर की बेटी , मैं तो किसान का बेटा हूँ


तुम रबडी खीर मलाई हो, मै तो सत्तू सपरेटा हूँ


तुम AC घर में रहती हो, मैं पेड के नीचे लेटा हूँ


तुम नयी मारुती लगती हो, मै स्कूटर लम्ब्रेटा हूँ





इस कदर अगर हम छुप छुप कर, आपस में प्यार बढाएंगे


तो एक रोज तेरे डेडी, अमरीश पुरी बन जाएंगे


सब हड्डी पसली तोड मुझे वो भिजव देंगे जेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये





तुम अरब देश की घोडी हो, मैं हूँ गदहे की नाल प्रिये.


तुम दीवाली का बोनस हो, मै भूखों की हडताल प्रिये.


तुम हीरे जडी तश्तरी हो, मैं एल्युमिनिअम का थाल प्रिये.


तुम चिकन सूप बिरयानी हो, मैं कंकड वाली दाल प्रिये.


तुम हिरन चौकडी भरती हो, मै हू कछुए की चाल प्रिये.


तुम चंदन वन की लकडी हो, मैं हू बबूल की छाल प्रिये


मै पके आम सा लटका हूँ मत मारो मुझे गुलेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये





मै शनी देव जैसा कुरूप, तुम कोमल कन्चन काया हो


मै तन से मन से कांशी राम, तुम महा चंचला माया हो


तुम निर्मल पावन गंगा हो, मैं जलता हुआ पतंगा हूँ


तुम राज घाट का शांति मार्च, मै हिन्दू मुस्लिम दंगा हूँ


तुम हो पूनम का ताजमहल, मै काली गुफा अजन्ता की


तुम हो वरदान विधाता का, मैं गलती हूँ भगवंता की


तुम जेट विमान की शोभा हो, मैं बस की ठेलमठेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये




तुम नयी विदेशी मिक्सी हो, मै पत्थर का सिलबट्टा हूँ


तुम ए. के. सैतालिस जैसी, मैं तो एक देसी कट्टा हूँ


तुम चतुर राबडी देवी सी, मै भोला भाला लालू हूँ


तुम मुक्त शेरनी जन्गल की, मै चिडिया घर का भालू हूँ


तुम व्यस्त सोनिया गाँधी सी, मै वी पी सिंह सा खाली हूँ


तुम हँसी माधुरी दीक्षित की, मैं हवलदार की गाली हूँ


कल जेल अगर हो जाये तो, दिलवा देना तुम 'बेल' प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये





मैं ढाबे के ढाँचे जैसा, तुम पाँच सितार होटल हो


मैं महुए का देसी ठर्रा, तुम 'रेड लेबल' की बोतल हो


तुम चित्रहार का मधुर गीत, मै कृषि दर्शन की झाडी हूँ


तुम विश्व सुन्दरी सी कमाल, मैं तेलिया छाप कबाडी हूँ


तुम सोनी का मोबाइल हो, मैं टेलीफोन वाला चोगा


तुम मछली मनसरोवर की, मैं हूँ सागर तट का घोंघा


दस मंजिल से गिर जाऊंगा, मत आगे मुझे धकेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये





तुम सत्ता की महारानी हो, मैं विपक्ष की लचारी हूं


तुम हो ममता जयललिता सी, मैं क्वाँरा अटल बिहारी हूँ


तुम तेन्दुलकर का शतक प्रिये, मैं फालो-आन की पारी हूँ


तुम Getz, Maruti, Santro हो, मैं Leyland की लारी हूं


मुझको रेफ्री ही रहने दो, मत खेलो मुझसे खेल प्रिये


मुश्किल है अपना मेल प्रिये, ये प्यार नही है खेल प्रिये ......